Категории

हिन्दू साम्राज्य 'विजयनगर' को जानिए (Vijayanagara Empire)। Karnataka - कुछ इतिहास और रोचक तथ्य।

1 Просмотры
Опубликовано на Admin В Total battle триумф империй

Спасибо! Поделитесь с друзьями!

URL

Вам не понравилось видео. Спасибо за то что поделились своим мнением!

К сожалению, только зарегистрированные пользователи могут создавать списки воспроизведения.
URL


Описание

विजयनगर (लगभग 1350 ई. से 1565 ई.) का शाब्दिक अर्थ है- 'जीत का शहर'। प्रायः इस नगर को मध्ययुग का प्रथम हिन्दू साम्राज्य माना जाता है। 14 वीं शताब्दी में उत्पन्न विजयनगर साम्राज्य को मध्ययुग और आधुनिक औपनिवेशिक काल के बीच का संक्रान्ति-काल कहा जाता है। इस साम्राज्य की स्थापना 1336 ई. में दक्षिण भारत में तुग़लक़ सत्ता के विरुद्ध होने वाले राजनीतिक तथा सांस्कृतिक आन्दोलन के परिणामस्वरूप संगम पुत्र हरिहर एवं बुक्का द्वारा तुंगभद्रा नदी के उत्तरी तट पर स्थित अनेगुंडी दुर्ग के सम्मुख की गयी। अपने इस साहसिक कार्य में उन्हें ब्राह्मण विद्वान माधव विद्यारण्य तथा वेदों के प्रसिद्ध भाष्यकार 'सायण' से प्रेरणा मिली। विजयनगर साम्राज्य का नाम तुंगभद्रा नदी के दक्षिण किनारे पर स्थित उसकी राजधानी के नाम पर पड़ा। उसकी राजधानी विपुल शक्ति एवं सम्पदा की प्रतीक थी। विजयनगर के विषय में फ़ारसी यात्री 'अब्दुल रज्जाक' ने लिखा है कि, "विजयनगर दुनिया के सबसे भव्य शहरों में से एक लगा, जो उसने देखे या सुने थे।"

विंध्याचल के दक्षिण का भारत 200 वर्षों से अधिक समय तक विजयनगर और बहमनी राज्यों के प्रभुत्व में रहा। उन्होंने न केवल क़ानून और व्यवस्था बनाये रखी, बल्कि व्यापार तथा हस्तशिल्प का विकास भी किया। कला और साहित्य को प्रोत्साहन दिया तथा अपनी राजधानियों को सुन्दर बनायां उत्तर भारत में जबकि विघटनकारी शक्तियाँ धीरे-धीरे विजयी हुईं, दक्षिण भारत में लम्बे समय तक स्थिर शासन रहे। इस स्थिरता का अन्त पंद्रहवीं शताब्दी के अन्त में बहमनी साम्राज्य के विघटन से और उसके पचास वर्षों के बाद 1565 की राक्षस-टंगड़ी की लड़ाई में पराजय के बाद विजयनगर साम्राज्य के टूटने से हुआ। इस बीच भारत की परिस्थितियों में पूर्णतः परिवर्तन हो गया। यह परिवर्तन पहले समुद्री मार्ग से यूरोपीयों (पुर्तग़ाल) के आगमन के कारण और फिर उत्तर भारत में मुग़लों के आक्रमण और विजय के कारण हुआ। मुग़लों के आगमन से उत्तर भारत में एकता के सूत्र एक बार फिर पनपे पर साथ ही भूमि आधारित एशियाई शक्तियों और समुद्र पर प्रभुत्व रखने वाली यूरोपीय शक्तियों के मध्य एक लम्बे संघर्ष के युग का भी सूत्रपात हुआ।

उत्पत्ति मतभेद
विजयनगर साम्राज्य के संस्थापकों की उत्पत्ति के बारे में स्पष्ट जानकारी के अभाव में इतिहासकारों में विवाद है। कुछ विद्वान ‘तेलुगु आन्ध्र’ अथवा काकतीय उत्पत्ति मानते हैं, तो कुछ 'कर्नाटा' (कर्नाटक) या होयसल तथा कुछ 'काम्पिली' उत्पत्ति मानते हैं। हरिहर और बुक्का ने अपने पिता संगम के नाम पर संगम राजवंश की स्थापना की। विजयनगर साम्राज्य की राजधानियाँ क्रमश: अनेगुंडी या अनेगोण्डी, विजयनगर, पेनुगोण्डा तथा चन्द्रगिरी थीं। हम्पी (हस्तिनावती) विजयनगर की पुरानी राजधानी का प्रतिनिधित्व करता है। विजयनगर का वर्तमान नाम 'हम्पी' (हस्तिनावती) है।

वियजनगर साम्राज्य की स्थापना पाँच भाईयों वाले परिवार के दो सदस्यों हरिहर और बुक्का ने की थी। कंवदंतियों के अनुसार वे वारंगल क ककातीयों के सामंत थे और बाद में आधुनिक कर्नाटक में काम्पिली राज्य में मंत्री बने थे। जब एक मुसलमान विद्रोही को शरण देने पर मुहम्मद तुग़लक़ ने काम्पिली को रौद डाला, तो इन दोनों भाईयों को भी बंदी बना लिया गया था। इन्होंने इस्लाम स्वीकार कर लिया और तुग़लक ने इन्हें वहीं विद्रोहियों को दबाने के लिए विमुक्त कर दिया। तब मदुरई के एक मुसलमान गवर्नर ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया था और मैसूर के होइसल और वारगंल के शासक भी स्वतंत्र होने की कोशिश कर रहे थे। कुछ समय बाद ही हरिहर और बुक्का ने अपने नये स्वामी और धर्म को छोड़ दिया। उनके गुरु विद्यारण के प्रयत्न से उनकी शुद्धि.

विजयनगर के राजवंश
विजयनगर साम्राज्य पर जिन राजवंशों ने शासन किया, वे निम्नलिखित हैं-
1. संगम वंश - 1336-1485 ई.
2. सालुव वंश - 1485-1505 ई.
3. तुलुव वंश - 1505-1570 ई.
4. अरविडु वंश - 1570-1650 ई.

विजयनगर काल में मलाया, बर्मा, चीन, अरब, ईरान, अफ़्रीका, अबीसीनिया एवं पुर्तग़ाल से व्यापार होता था। मुख्य निर्यातक वस्तुऐं थीं - कपड़ा, चावल, गन्ना, इस्पात, मसाले, इत्र, शोरा, चीनी आदि। आयात की जाने वाली वस्तुऐं थीं - अच्छी नस्ल के घोड़े, हाथी दांत, मोती बहुमूल्य पत्थर, नारियल, पॉम, नमक आदि। मोती फ़ारस की खाड़ी से तथा बहुमूल्य पत्थर पेगू से मंगाये जाते थे। नूनिज ने हीरों के ऐसे बन्दरगाह की चर्चा की है, जहाँ विश्व भर में सर्वाधिक हीरों की खानें पायी जाती थीं। व्यापार मुख्यतः चेट्टियों के हाथों में केन्द्रित था। दस्तकार वर्ग के व्यापारियों को 'वीर पांचाल' कहा जाता था।

History of the Vijayanagar Empire, Hindu history, Hindu Kingdom, विजयनगर साम्राज्य का इतिहास, हिन्दू इतिहास, हिंदू साम्राज्य, NCERT notes on the Sources of Vijayanagar Empire in Hindi, NCERT notes in Hindi, Sources of Vijayanagar Empire in Hindi, Foreign Traveller Accounts on the Vijayanagar Empire in Hindi, archaeological sources on the Vijayanagara Empire in Hindi, harihara vijayanagara dynasty,vijayanagar dynasty,vijayanagar dynasty capital,vijayanagar dynasty upsc,vijaynagar empire administration,vijaynagar empire army,vijaynagar empire economy","articleSection":"History,Medival history of india, विजयनगर किला, विजयनगर किला Thanjavur, Thanjavur attractions, Thanjavur places to visit, Thanjavur tourist attractions, Thanjavur sight seeing, Tourist Attractions in कर्नाटक, कर्नाटक Tourist Attractions, Places To visit in Karnataka, Tourism Places in कर्नाटक, Travel and Tourist Information कर्नाटक, Karnataka Tourist Destinations, Tourist Places to visit in Karnataka, Tourist Spots in Karnataka, Karnataka Tourism, Popular Destinations in Karnataka, Travel & Tourist Information Karnataka,India, हिंदी डाक्यूमेंट्री .

Показать больше

Написать комментарий

Комментарии

Комментариев нет.
Яндекс.Метрика